बिहार की राजनीति में बजट सत्र से ठीक पहले NDA विधायक दल की बैठक ने सत्ता पक्ष की रणनीति को लेकर कई संकेत दे दिए हैं। बैठक के समापन के बाद यह स्पष्ट हो गया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस सत्र को केवल औपचारिक कार्यवाही तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि सदन के भीतर सरकार की मौजूदगी और जवाबदेही को लेकर बेहद गंभीर हैं। संसदीय कार्य मंत्री विजय चौधरी ने बैठक की जानकारी साझा करते हुए बताया कि मुख्यमंत्री ने सभी विधायकों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे सदन के भीतर हर स्थिति में मौजूद रहें और सरकार की ओर से दिए जाने वाले जवाबों के दौरान मजबूती से खड़े दिखें।
एनडीए विधायक दल की यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब विधानसभा में आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया जा चुका है और बजट आने वाला है। विजय चौधरी के अनुसार, सरकार ने अब तक जो कार्य किए हैं, उनकी रूपरेखा आर्थिक सर्वेक्षण के माध्यम से दोनों सदनों के पटल पर रख दी गई है। यह सर्वेक्षण न केवल बीते वर्ष की उपलब्धियों का लेखा-जोखा है, बल्कि आने वाले बजट की दिशा भी तय करता है। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार आगे किन क्षेत्रों पर जोर देगी, इसकी झलक आर्थिक सर्वेक्षण में साफ़ देखी जा सकती है।
बैठक के संदेश का राजनीतिक अर्थ भी कम अहम नहीं है। विपक्ष के आक्रामक तेवरों और सदन में संभावित हंगामे को देखते हुए मुख्यमंत्री का यह निर्देश सत्ता पक्ष के लिए एक तरह का अलर्ट माना जा रहा है। नीतीश कुमार यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि जब भी मंत्रियों की ओर से जवाब दिया जाए, तब सदन में खाली कुर्सियों का संदेश बाहर न जाए। इससे सरकार की गंभीरता और एकजुटता दोनों ही प्रदर्शित होती हैं।
इधर, बिहार विधानसभा सत्र के पहले दिन उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने अपनी शुरुआत एक प्रतीकात्मक कदम के साथ की। उन्होंने पीपल के पेड़ में पानी डालकर दिन की शुरुआत की और इसे पर्यावरण तथा विकास के संतुलन से जोड़ते हुए देखा गया। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि जो बजट आने वाला है, वह केवल बिहार ही नहीं, बल्कि विकसित भारत की परिकल्पना को भी मजबूती देगा। उनके अनुसार, इस बजट में बिहार के लिए कई अहम प्रावधान होंगे और यह एक बड़े विजन के साथ पेश किया जाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि बजट आने के बाद तस्वीर और भी साफ़ होगी।

नीट की छात्रा से जुड़े मामले पर भी उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने सरकार का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि परिजनों के आरोप सामने आने के बाद ही इस पूरे मामले को केंद्रीय एजेंसी को सौंप दिया गया है। अब जांच पूरी तरह केंद्रीय एजेंसी के हाथ में है और किसी भी स्तर पर गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी दोहराया कि जो लोग इस मामले में दोषी पाए जाएंगे, उन्हें किसी भी सूरत में छोड़ा नहीं जाएगा।






















