अंतरराष्ट्रीय राजनीति के संवेदनशील मुद्दे वेनेजुएला को लेकर देश की सियासत में नई बहस छिड़ गई है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए राज्यसभा सांसद और आरजेडी नेता मनोज झा (Manoj Jha on Owaisi Statement) ने न सिर्फ उस बयान की आलोचना की, बल्कि भारत की ऐतिहासिक विदेश नीति और वैश्विक कूटनीतिक मूल्यों की भी याद दिलाई। मनोज झा का यह बयान ऐसे समय आया है जब दुनिया भर में संप्रभुता, अंतरराष्ट्रीय कानून और शक्ति संतुलन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मनोज झा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह अवसर इस तरह की बयानबाज़ी का नहीं है। उनके मुताबिक, मुद्दा वेनेजुएला का है और वहां जो कुछ भी हुआ, वह बिना किसी उकसावे के एक संप्रभु देश पर हमला है। उन्होंने इसे उस किस्म की दादागिरी बताया, जो सामंती समाजों में देखने को मिलती थी, जहां ताकत के बल पर फैसले थोपे जाते थे। झा का कहना था कि अंतरराष्ट्रीय कानून किसी भी देश को ऐसी कार्रवाई की इजाजत नहीं देता और यही कारण है कि पूरी दुनिया को इस पर गंभीर चिंता जतानी चाहिए।
इस बयान के जरिए मनोज झा ने भारत की विदेश नीति की ऐतिहासिक निरंतरता को भी सामने रखा। उन्होंने 1952, 1954 और 1957 का ज़िक्र करते हुए कहा कि उन वर्षों में भारत आर्थिक रूप से आज जितना समृद्ध नहीं था, लेकिन तब भी देश ने वैश्विक मंच पर मजबूती से अपनी बात रखी। उनके अनुसार, चाहे किसी भी सरकार का दौर रहा हो, भारत की विदेश नीति ने कभी किंतु-परंतु नहीं किया और हमेशा संप्रभुता, शांति और अंतरराष्ट्रीय नियमों के पक्ष में स्पष्ट रुख अपनाया।





















