Nitish Kumar Tejashwi Yadav Talk: Bihar Politics Update: बिहार विधानसभा और विधान परिषद के संयुक्त सत्र के दौरान उस वक्त सियासी हलचल तेज हो गई जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव अचानक आपस में बातचीत करते नजर आए। यह दृश्य उस समय सामने आया जब राज्यपाल का अभिभाषण चल रहा था और पूरे सदन की निगाहें मंच पर टिकी हुई थीं। पहले हल्की बातचीत और ठहाकों का दौर चला, फिर नीतीश कुमार ने खुद पहल करते हुए तेजस्वी यादव से संवाद शुरू किया। कुछ ही पलों में यह बातचीत कैमरों में कैद हो गई और सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा का विषय बन गई।
तेजस्वी यादव पहले राबड़ी देवी के पास बैठे थे, लेकिन नीतीश कुमार को कोने में बैठे देखकर वे खुद आगे बढ़े और दोनों नेताओं के बीच कुछ देर तक बातचीत होती रही। यह दृश्य इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि वर्तमान में नीतीश कुमार एनडीए के साथ सत्ता में हैं और तेजस्वी यादव विपक्ष की भूमिका में हैं। इसके बावजूद दोनों नेताओं के बीच संवाद ने यह संकेत दिया कि बिहार की राजनीति में व्यक्तिगत रिश्ते और राजनीतिक मतभेदों के बीच संतुलन अभी भी कायम है।
राज्यपाल के अभिभाषण में सरकार की उपलब्धियों और आगामी योजनाओं का विस्तृत उल्लेख किया गया। इसमें स्वयं सहायता समूहों की भूमिका, जीविका योजना की सफलता, महिला आरक्षण, खेलो इंडिया यूथ गेम्स के आयोजन और केंद्र सरकार के सहयोग से चल रही विकास परियोजनाओं की चर्चा प्रमुख रही। अभिभाषण के दौरान यह भी कहा गया कि अगले पांच वर्षों के लिए “सात निश्चय-3” कार्यक्रम के तहत राज्य की प्रति व्यक्ति आय को दोगुना करने, हर जिले में उद्योग स्थापित करने, कृषि को मजबूत करने और शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने का लक्ष्य रखा गया है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि कृषि क्षेत्र को समृद्ध बनाने के लिए किसानों की आमदनी बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। शिक्षा के क्षेत्र में प्रत्येक प्रखंड में आदर्श विद्यालय और डिग्री कॉलेज खोलने की योजना है, जबकि पटना में एक नई एजुकेशन सिटी के निर्माण का प्रस्ताव भी रखा गया है। उद्योग नीति के तहत सभी जिलों में औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना कर रोजगार के अवसर पैदा करने की बात कही गई।
इसी बीच नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव की बातचीत को लेकर राजनीतिक विश्लेषक इसे आने वाले बजट सत्र की रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं। उनका मानना है कि यह संवाद महज औपचारिक नहीं था, बल्कि सदन में आगे होने वाली बहस और राजनीतिक समीकरणों का संकेत भी हो सकता है। विपक्ष जहां सरकार की योजनाओं पर सवाल उठाने की तैयारी में है, वहीं सत्ता पक्ष अपने विकास एजेंडे को मजबूती से रखने की रणनीति बना रहा है।






















