चिराग पासवान ने एक ऐसा बयान दे दिया है, जिसने लोजपा परिवारिक विवाद को नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। अब तक खामोश रहने वाले केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने पहली बार अपने चाचा पशुपति कुमार पारस पर सीधे आरोपों की बौछार कर दी है। उन्होंने न सिर्फ अपनी मां की बेदखली का दर्द बयां किया, बल्कि संपत्ति बंटवारे की खुली चुनौती भी दे डाली।
“मेरी मां को पार्टी से निकाला गया”
पटना में मीडिया से बात करते हुए चिराग ने कहा कि मुझे बोलना नहीं चाहिए था, लेकिन अब बहुत हो गया। जिस पार्टी को मेरे पिता ने खड़ा किया, उसी पार्टी से मेरी मां को बाहर निकाल दिया गया। उन्होंने बताया कि हाल ही में वे खगड़िया जाकर अपनी मां से मिले और जो बातें सामने आईं, वो दिल दहला देने वाली थीं। उन्होंने भावुक स्वर में कहा कि मेरी मां को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। उन्हें परिवार से दूर कर दिया गया।
पारिवारिक संपत्ति पर खुली चुनौती
चिराग यहीं नहीं रुके। उन्होंने चाचा पशुपति पारस और उनके परिवार पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर इतना ही हक चाहिए, तो चलिए, संपत्ति का बंटवारा कर लीजिए। बताइए कहां-कहां क्या है, मैं भी तैयार हूं। लेकिन पारिवारिक झगड़े में महिलाओं को घसीटना बंद कीजिए।
“जिसे अभिभावक होना चाहिए, वही बर्बादी कर रहा है”
अपने बयान में चिराग ने यह भी कहा कि परिवार में जो शख्स ‘अभिभावक’ की भूमिका में होना चाहिए था, वही आज बर्बादी का जिम्मेदार बन चुका है। उन्होंने संकेत साफ कर दिया कि पारिवारिक कलह अब चरम पर है और सुलह के रास्ते लगभग बंद हो चुके हैं।
वक्फ बिल पर भी चिराग का सियासी वार
राजनीति के मोर्चे पर भी चिराग ने तीखा रुख अपनाया। वक्फ बिल पर विपक्षी हमलों को नकारते हुए उन्होंने कहा कि “यह बिल गरीब मुसलमानों के अधिकार के लिए लाया गया है। कोर्ट जाना है तो जाइए, किसने रोका है?”