ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) और देशभर के प्रमुख धार्मिक व सामाजिक मुस्लिम संगठनों ने वक्फ संशोधन विधेयक 2024 के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करने के लिए आज 26 मार्च को पटना में एक विशाल विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। यह धरना पटना के गर्दनी बाग में सुबह 10 बजे से हो रहा है, जिसमें बिहार के विभिन्न हिस्सों से मुस्लिम समुदाय के लोग और न्यायप्रिय नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए हैं।
सदन में विपक्षी सदस्यों ने उठा ली कुर्सी.. स्पीकर ने स्थगित की कार्यवाही, कहा- चलिए फोटो खिंचाने
इस धरना प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उत्तर प्रदेश के नगीना के सांसद चंद्रशेखर भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि आज जिस तरह के हालात देश में हैं उस हालात को समझते हुए जिसके अधिकारों पर पर हमला होगा वह उसकी रक्षा के लिए सड़कों पर उतरेगा। उन्होंने कहा कि मैं जिस वर्ग की राजनीति करता हूं, बहुजन, पिछड़ा, अल्पसंख्यक उनको संविधान ने जो अधिकार दिए हैं उसी की रक्षा के लिए आज हम लोग सड़क पर उतरे हैं। उन्होंने कहा-जहां भी लोगों का हक छीना जाएगा, वे वहां मौजूद रहेंगे।

वहीं ईद पर सौगात ए मोदी गिफ्ट पर उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सियासत इस तरह लोगों पर एहसान करती है, पहले आंखें छीनती है फिर दान करती है। उन्होंने कहा कि सरकार पहले मुसलमानों के मजार, मस्जिद, खानकाह, कब्रिस्तान, तालीमी इदारे पर अतिक्रमण और हमले कर रही है, और ईद पर किट बांटने की बात कर रही है। यह कैसा मजाक है। वहीं बिहार में चुनाव लड़ने की बात पर उन्होंने कहा कि आज़ाद समाज पार्टी चुनाव पर काम कर रही है, जल्द ही इसकी पूरी जानकारी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि अभी बिहार में जंगल राज है इसको बदलना बहुत जरूरी है।

उधर, बिहार विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले विपक्ष ने सदन के बाहर जोरदार हंगामा किया है। विपक्षी विधायक हाथों में पोस्टर लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते नजर आए। विपक्षी सदस्य वक्फ संशोधन बिल का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से इस बिल को तत्काल वापस लेने की मांग की है। आरजेडी विधायक ने इस बिल का विरोध करते हुए इसे काला कानून करार दिया है। उन्होंने कहा कि पार्लियामेंट में जो वक्फ संशोधन बिल लाया गया है यह एक काला कानून है। इसके माध्यम से पूरे देश को आग लगाने की कोशिश की जा रही है। यह कानून केवल अल्पसंख्यक समाज के लिए ही नहीं है बल्कि भारत के संविधान के मूल आत्मा के खिलाफ है। भारत के संविधान में जो धार्मिक स्वतंत्रता है, उसके खिलाफ यह कानून है।