PM Modi Purnea: सीमांचल के केंद्र पूर्णिया के लिए शनिवार का दिन राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से बेहद खास होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पश्चिम बंगाल दौरे से पहले उनका विमान पूर्णिया एयरपोर्ट पर लैंड करेगा। भले ही यह पड़ाव ट्रांजिट विजिट के तौर पर तय है, लेकिन प्रधानमंत्री के आगमन की खबर ने पूरे क्षेत्र में उत्साह और हलचल बढ़ा दी है। लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति में खुद को उपेक्षित मानने वाले सीमांचल के लिए यह पड़ाव प्रतीकात्मक रूप से भी अहम माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री के संभावित आगमन को देखते हुए पूर्णिया एयरपोर्ट और उसके आसपास सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व रूप से मजबूत किया गया है। जिला प्रशासन, एयरपोर्ट अथॉरिटी और केंद्र की सुरक्षा एजेंसियां आपसी समन्वय के साथ तैयारियों में जुटी हैं। स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप यानी एसपीजी ने एयरपोर्ट परिसर को अपने नियंत्रण में ले लिया है और हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जा रही है। प्रधानमंत्री यहां अल्प समय के लिए रुकेंगे, लेकिन इस दौरान प्रोटोकॉल से जुड़ी हर व्यवस्था को अंतिम रूप दे दिया गया है।
इस ट्रांजिट विजिट को बिहार सरकार भी राजनीतिक और प्रशासनिक गंभीरता से ले रही है। प्रधानमंत्री की अगवानी के लिए राज्य सरकार ने अपने दो कद्दावर मंत्रियों को जिम्मेदारी सौंपी है। राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप जायसवाल और खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री लेसी सिंह पूर्णिया एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री का स्वागत करेंगे। दोनों मंत्री सीमांचल की राजनीति में प्रभावशाली चेहरा माने जाते हैं, ऐसे में उनका चयन केवल औपचारिकता नहीं बल्कि क्षेत्रीय संतुलन और संदेश देने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल और असम के दो दिवसीय दौरे पर हैं, जहां उनका फोकस बुनियादी ढांचे और रेलवे के आधुनिकीकरण पर रहेगा। पश्चिम बंगाल के मालदा से वे अपने इस दौरे की शुरुआत करेंगे और मालदा टाउन रेलवे स्टेशन पर हावड़ा से गुवाहाटी यानी कामाख्या के बीच देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। यह ट्रेन पूर्वी भारत के लिए रेलवे के एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।
मालदा में ही प्रधानमंत्री करीब 3,250 करोड़ रुपये से अधिक की रेल और सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। इसके बाद अगले दिन 18 जनवरी को वे हुगली जिले के सिंगूर पहुंचेंगे, जहां लगभग 830 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित किया जाएगा। इसी कार्यक्रम में तीन अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को भी हरी झंडी दिखाई जाएगी, जिससे पूर्वी भारत की रेल कनेक्टिविटी को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।






















