[Team insider] ड्रीम प्रोजेक्ट और झारखंड का पहला मेगा फूड पार्क उत्पादन शुरू होने के पहले ही नीलाम हो गया। पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इसको लेकर बड़े सपने परोसे थे। आनन फानन 15 फरवरी 2016 को तत्कालीन केंद्रीय खाद्य एवं प्रसंस्करण उद्योग मंत्री हरसिमरत कौर बाद से इस पार्क का उद्घाटन भी करा दिया गया था, मगर यह चल नहीं सका।

120 करोड़ रुपये का हुआ था निवेश
रांची के गेतलसूत इलाके में फूड पार्क में करीब 120 करोड़ रुपये का निवेश हुआ था मगर 20.76 करोड़ में नीलाम हो गया। नीरज अग्रवाल नाम उद्यमी ने इसे खरीदा है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल की कोलकाता बेंच ने इस संबंध में फैसला सुना दिया है। एक माह के भीतर खरीदार को करीब पौने पांच करोड़ रुपये अदा करने होंगे। पांच किस्त में पूरी राशि तीन साल के भीतर चरणबद्ध तरीके से अदा करनी होगी।
56 एकड़ जमीन पर 2009 में हुआ था शिलान्यास
इस फूड पार्क पर 2018 में संकट के बादल उसी समय मंडराने लगे थे जब इसके निदेशक का दुबई में निधन हो गया था। इस पर इलाहाबाद बैंक(अब इंडियन बैंक) का ही 49.64 करोड़ रुपये का कर्ज था, शेष राशि प्रमोटरों आदि का था। बता दें कि रियाडा(रांची एरिया इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट ऑथोरिटी) की 56 एकड़ जमीन पर वर्ष 2009 में इसका शिलान्यास हुआ था। पहले भी इसे झंझावातों से गुजरना पड़ा। रियाडा की 56 एकड़ जमीन तो मिल गई मगर कंपनी को इस जमीन को सब लीज करने का अधिकार राज्य सरकार नहीं दे रही थी। जबकि इसमें करीब 33 इकाइयां स्थापित की जानी थी। नतीजतन शिलान्यास के तीन साल बाद ही भारत सरकार ने इसे बिहार शिफ्ट करने की धमकी दे दी थी।
राज्य सरकार ने सब लीज का दिया था अधिकार

केंद्र की धमकी के बाद राज्य सरकार ने सब लीज का अधिकार दिया था। कंपनी में बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद, पेंटालून और फ्यूचर ग्रुप भी जुड़े मगर साथ नहीं चल सके। रघुवर शासन के अंतिम समय में बाबा रामदेव ने भी इसमें दिलचस्पी दिखाई थी मगर मामला फाइनल नहीं हुआ। किसानों से फूड पार्क के नाम पर वर्षों पहले जमीन ली गई मगर पार्क चालू नहीं हुआ तो आजसू पार्टी ने इसे चालू कराने को लेकर आंदोलन की चेतावनी दी थी।
सांसद ने इसे लेकर राज्यसभा में भी पिछले साल उठाया था सवाल
सांसद महेश पोद्दार ने इसे लेकर राज्यसभा में भी पिछले साल सवाल उठाया था। तब खद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री ने प्रहृलाद सिंह पटेल ने कहा था कि 30 मार्च 2009 को स्वीकृत गेतलसूद के मेगा फूड पार्क परियोजना को 24 सितंबर 2019 को रद्द करना पड़ा। पिछले साल नवंबर में प्रह्लाद सिंह पटेल को फूड पार्क के लिए महेश अग्रवाल ने ज्ञापन सौंप झारखंड में फूड पार्क की स्थापना का अनुरोध किया तो मंत्री का कहना था कि झारखंड में मिनी फूड पार्कों के लिए पर्याप्त संभावनाएं हैं। राज्य सरकार से प्रस्ताव मिले तो अविलंब मंजूरी दी जायेगी। बहरहाल नीरज अग्रवाल इस फूड पार्क का क्या भविष्य दिखलाते हैं यह समय बतायेगा।