बिहार की राजनीति में मिथिला क्षेत्र को लेकर एक बार फिर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। राज्यसभा सांसद और जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा ने एक बड़ा बयान देकर मिथिला के विकास पर NDA सरकार के योगदान को रेखांकित किया है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 300 दिन मखाना खाते हैं, मैथिली भाषा में संसद की कार्यवाही का त्वरित अनुवाद करवा रहे हैं, और मिथिला के लिए नई-नई विकास परियोजनाएं ला रहे हैं। इसके साथ ही, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करते समय मधुबनी पेंटिंग की साड़ी पहनकर मिथिला संस्कृति को राष्ट्रीय पहचान दी है। लेकिन, इन सब उपलब्धियों के बावजूद, कुछ राजनीतिक ताकतें मिथिला के विकास को लेकर ‘असहज’ महसूस कर रही हैं।
NDA सरकार ने दिया मिथिला को सम्मान, ‘उन्होंने’ किया था अपमान?
संजय झा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मिथिला के महान सपूत ‘जननायक’ कर्पूरी ठाकुर जी को ‘भारत रत्न’ देने की सिफारिश की, जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने स्वीकार कर लिया। इसके अलावा, उड़ान स्कीम के तहत दो नए एयरपोर्ट में से एक दरभंगा को मिला और बिहार का दूसरा एम्स भी दरभंगा में स्थापित किया गया। संजय झा ने विपक्ष से सवाल पूछा है कि जब NDA सरकार मिथिला के विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जा रही है, तो ‘उन्हें’ क्यों दर्द हो रहा है?
मिथिला के विकास को किसने रोका? संजय झा ने खोला पुराना ‘राज़’
संजय झा ने 2002 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के दौरान दरभंगा में ‘राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र’ की स्थापना को याद दिलाते हुए कहा कि यह मखाना की खेती को वैज्ञानिक रूप से विकसित करने के लिए बनाया गया था। लेकिन बाद में ‘उनकी’ केंद्र सरकार ने इस अनुसंधान केंद्र का राष्ट्रीय दर्जा छीन लिया, जिससे फंडिंग रुक गई और किसानों को बड़ा नुकसान हुआ। NDA सरकार बनने के बाद इस अनुसंधान केंद्र को फिर से राष्ट्रीय दर्जा दिया गया।
मैथिली भाषा के सम्मान की लड़ाई – किसने छीना और किसने लौटाया?
संजय झा ने कहा कि ‘उन्होंने’ 1990 में बिहार की सत्ता संभालने के बाद मैथिली को राज्य की आधिकारिक भाषा और BPSC की परीक्षा की भाषा सूची से हटा दिया था। इसके बाद, 2003 में नीतीश कुमार के अनुरोध पर अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने मैथिली को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल किया और UPSC में इसे मान्यता मिली। 2005 में बिहार की सत्ता में आते ही नीतीश कुमार ने मैथिली को दोबारा BPSC की भाषा सूची में शामिल कराया।
बाढ़ से त्रस्त मिथिला – ‘उन्होंने’ कुछ नहीं किया, नीतीश बने ‘क्विंटलिया बाबा’
मिथिला का सबसे बड़ा मुद्दा हर साल आने वाली बाढ़ रही है। संजय झा ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि जब वे सत्ता में थे, ‘उन्होंने’ कभी भी बाढ़ राहत के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया, न ही प्रभावित लोगों को कोई मुआवजा दिया। इसके विपरीत, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बाढ़ प्रभावितों के लिए मुआवजा देने की शुरुआत की, जिसके कारण मिथिला के लोग उन्हें प्यार से ‘क्विंटलिया बाबा’ कहने लगे।
तो ‘उनका’ दर्द क्या है?
संजय झा ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि आज जब NDA सरकार मिथिला के विकास के लिए ऐतिहासिक फैसले ले रही है, तो ‘उन्हें’ दर्द होना स्वाभाविक है। यह वही लोग हैं जिन्होंने बिहार को ‘बीमारू राज्य’ बनाए रखने की साजिश रची थी और मिथिला को विकास से वंचित रखा था। लेकिन अब मिथिला के लोग देख रहे हैं कि डबल इंजन सरकार किस तरह क्षेत्र को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर पहचान दिला रही है।