पटना एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत करते हुए राजद के राज्यसभा सांसद संजय यादव (Sanjay Yadav) ने बिहार की कानून-व्यवस्था को लेकर एनडीए सरकार पर जोरदार हमला बोला। मुजफ्फरपुर में नीट की छात्रा को जिंदा जलाकर मार दिए जाने की जघन्य घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल एक अपराध नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन की संवेदनहीनता और विफलता का भयावह उदाहरण है। संजय यादव ने सवाल उठाया कि जब राज्य में इस तरह की घटनाएं खुलेआम हो रही हों, तो सरकार के सुशासन के दावे आखिर किस आधार पर टिके हैं।
सांसद ने अपने बयान में पिछले दो दशकों के एनसीआरबी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि एनडीए शासनकाल में बिहार में 70 हजार से अधिक हत्याएं दर्ज की गई हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि चुनाव आते ही दिल्ली से आने वाले नेता ‘जंगलराज’ का डर दिखाकर जनता को गुमराह करते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि अपराध के आंकड़े मौजूदा सत्ता की पोल खुद खोल देते हैं। संजय यादव के मुताबिक, अपराध को लेकर बनाई गई राजनीतिक कथा और जमीनी हकीकत के बीच गहरी खाई है।
सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि जिस तंत्र के पास चुनावी प्रबंधन और कथित तौर पर वोटरों को लुभाने के लिए हजारों करोड़ रुपये खर्च करने की क्षमता है, वही तंत्र अपराध नियंत्रण में खुद को असहाय क्यों साबित कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि आज भी बिहार के कई थानों में बुनियादी सुरक्षा संसाधन, जैसे सीसीटीवी कैमरे, अधूरे हैं, लेकिन चुनावी प्रचार और इवेंट मैनेजमेंट पर बेहिसाब खर्च किया जाता है।
महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को लेकर संजय यादव ने गहरी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि माताओं, बहनों और बेटियों के साथ दुष्कर्म और सामूहिक बलात्कार जैसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन दोष सिद्धि दर बेहद निराशाजनक बनी हुई है। उनका आरोप था कि कई मामलों में अपराधी जल्द जमानत पर बाहर आ जाते हैं और फिर से आपराधिक गतिविधियों में शामिल हो जाते हैं, जिससे पीड़ित परिवारों का न्याय से भरोसा टूटता जा रहा है।
अपने बयान के अंत में संजय यादव ने सरकार को सलाह दी कि वह ‘जंगलराज’ का राजनीतिक राग अलापने के बजाय जमीनी स्तर पर कानून-व्यवस्था सुधारने पर ध्यान दे। उन्होंने कहा कि बिहार को बदनाम करने वाली बयानबाजी से निवेश और विकास दोनों प्रभावित होते हैं। अगर सरकार वास्तव में जनता की सुरक्षा चाहती है, तो उसे सत्ता के अहंकार से बाहर निकलकर पुलिस व्यवस्था, न्यायिक प्रक्रिया और प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत करना होगा।






















