सोमनाथ स्वाभिमान पर्व (Somnath Swabhiman Parv) के मंच से सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण को लेकर एक सशक्त वैचारिक संदेश सामने आया। बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत पर गर्व करने का अवसर दिया है। उन्होंने कहा कि जिन असुरी प्रवृत्तियों ने सदियों तक सनातन संस्कृति को मिटाने का प्रयास किया, उनके बावजूद यह परंपरा आज और अधिक प्रखर होकर सामने आई है।
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ओंकार के उच्चारण से जाग्रत होने वाली देवत्व की भावना मानवता के भीतर मौजूद नकारात्मक प्रवृत्तियों को समाप्त करेगी और समाज को ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की दिशा में आगे बढ़ाएगी, जहां पूरी दुनिया एक परिवार के रूप में विकसित होगी। विजय कुमार सिन्हा ने प्रधानमंत्री की पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की आत्मा उसकी संस्कृति में बसती है और जब राष्ट्र अपनी जड़ों से जुड़ता है, तभी वह वैश्विक स्तर पर नेतृत्व करता है। उन्होंने पीएम मोदी के प्रयासों के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना को पुनर्जीवित करने का अभियान है, जो आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक पहचान से जोड़ता है।
इसी क्रम में बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमनाथ मंदिर के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि इस मंदिर को 17 बार तोड़ा गया, लेकिन हर बार सनातन समाज ने एकजुट होकर इसे पुनर्स्थापित किया। यह इतिहास इस बात का प्रमाण है कि सनातन धर्म को मिटाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत के गौरवशाली अतीत को वापस लाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं, जिसके तहत देशभर में धार्मिक और सांस्कृतिक कॉरिडोर विकसित किए गए हैं। सम्राट चौधरी ने बताया कि बिहार में भी लगभग 70 कॉरिडोर पर काम चल रहा है, जिनका उद्देश्य प्राचीन सनातन मंदिरों और तीर्थस्थलों को पुनः स्थापित करना और उन्हें सांस्कृतिक मानचित्र पर प्रमुख स्थान दिलाना है।






















