वक्फ संशोधन बिल पर देशभर में जारी सियासी संग्राम अब और तेज़ हो गया है। बिहार की सियासत में इस बिल को लेकर एक बड़ा धमाका हुआ है जब नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इसे न सिर्फ असंवैधानिक बताया, बल्कि खुले मंच से ऐलान कर दिया — “अगर हमारी सरकार बनी, तो इस बिल को बिहार में लागू नहीं होने देंगे… इसे कूड़ेदान में फेंक देंगे!”
“नागपुरिया कानून से नहीं चलने देंगे देश” — तेजस्वी का तीखा प्रहार
तेजस्वी यादव ने भाजपा पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि “ये वक्फ बिल नहीं, संविधान की हत्या का दस्तावेज है। आरएसएस और भाजपा नागपुर से कानून चलाना चाहते हैं। ये देश को एक ही रंग में रंगने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन हम सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्षता के सिपाही हैं — विचारधारा से समझौता नहीं करेंगे, चाहे सत्ता में रहें या बाहर।”
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यह बिल ध्रुवीकरण की राजनीति का हिस्सा है। “भाजपा जानती है कि वो बेरोजगारी, गरीबी, शिक्षा, पलायन जैसे असल मुद्दों पर कुछ नहीं कर सकती। इसलिए लोगों को हिंदू-मुस्लिम में बांटकर, ध्रुवीकरण की आग में अपनी रोटियां सेंक रही है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि भाजपा और उसके सहयोगी मुसलमानों, दलितों और पिछड़ों को मुख्यधारा से दूर रखने की सुनियोजित साजिश कर रहे हैं।
तेजस्वी ने कहा कि इस बिल का समर्थन करने वाले दल अब ‘सेकुलर’ कहलाने लायक नहीं बचे। अब कोई चाहे जितना जस्टिफिकेशन दे, पर्दा उठ चुका है। ये लोग अपने फायदे के लिए राजनीति करते हैं, देश और संविधान के लिए नहीं। तेजस्वी यादव ने बताया कि राजद की ओर से वक्फ बिल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की जा चुकी है, ठीक उसी तरह जैसे पार्टी ने 65 फीसदी आरक्षण के मामले में कानूनी लड़ाई लड़ी थी। हम संविधान की रक्षा के लिए लड़ रहे हैं। आरक्षण की लड़ाई कोर्ट में लड़ रहे हैं, अब वक्फ बिल पर भी कानूनी लड़ाई जारी रहेगी। बीजेपी को हर मोर्चे पर चुनौती देंगे — संसद में भी, सड़क पर भी और अदालत में भी।