केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के प्रमुख जीतन राम मांझी (Jitan Ram Manjhi) का एक पुराना वीडियो अचानक सोशल मीडिया पर वायरल होते ही बिहार की राजनीति में जबरदस्त हलचल मच गई है। वीडियो में मांझी चुनाव जीतने के लिए “उपाय” की बात करते दिखाई दे रहे हैं, जिसे विपक्ष ने चुनावी धांधली का कथित सबूत करार दिया है। वहीं मांझी ने इस पूरे विवाद को अपने खिलाफ रची गई साजिश बताते हुए साफ कहा है कि वीडियो से छेड़छाड़ कर उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि “मुसहर के लाल को बदनाम करने वाले भूल जाते हैं कि मांझी अब ब्रांड बन चुका है और किसी से डरने वाला नहीं है।”
वायरल वीडियो के सामने आते ही सबसे पहले राष्ट्रीय जनता दल और फिर कांग्रेस ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल खड़े किए। कांग्रेस ने इस वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा करते हुए इसे “वोट चोरी का सबूत” बताया और आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर लोकतंत्र को कमजोर कर रहा है। इस राजनीतिक हमले के बीच अब भारतीय जनता पार्टी भी खुलकर मांझी के बचाव में उतर आई है।
तत्काल टिकट पर रेलवे का डिजिटल वार.. OTP से होगी पहचान, दलालों की एंट्री लगभग बंद
बिहार बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि मांझी के बयान को गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है। उनके मुताबिक, मांझी ने कहीं भी नियम तोड़ने या अवैध तरीके से चुनाव जिताने की बात नहीं कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि मांझी ने केवल यह कहा था कि डीएम से नियमानुसार ईवीएम में डाले गए वोटों की सही गिनती और उसके अनुरूप परिणाम घोषित करने की बात हुई थी। दिलीप जायसवाल का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया इतनी पारदर्शी है कि कोई भी एक भी वोट इधर-उधर नहीं कर सकता।
बीजेपी नेता ने अपने तर्क को मजबूत करने के लिए 2020 विधानसभा चुनाव के उदाहरण भी गिनाए। उन्होंने कहा कि बीजेपी और एनडीए रामगढ़ सीट पर महज 30 वोट, ढाका सीट पर 178 वोट और फारबिसगंज सीट पर करीब डेढ़ सौ वोट से हार गई थी। अगर वास्तव में किसी तरह की हेराफेरी संभव होती, तो सबसे पहले इन सीटों पर एनडीए की जीत होती। उनका यह बयान विपक्ष के उन आरोपों पर सीधा जवाब माना जा रहा है, जिनमें चुनावी धांधली की बात कही जा रही है।
बिहार में सरकारी जमीन की खरीद-बिक्री पर तत्काल ब्रेक.. अफसरों की मिलीभगत पर होगी कड़ी कार्रवाई
दिलीप जायसवाल ने सीतामढ़ी जिले के परिहार विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां अंतिम राउंड में एनडीए उम्मीदवार लगभग 18 हजार वोट से आगे थीं, लेकिन एक ऑब्जर्वर की आपत्ति के चलते परिणाम घंटों तक रोके गए। बाद में चुनाव आयोग के हस्तक्षेप के बाद ही नतीजे घोषित हो सके। उनके अनुसार, कई बार तकनीकी या प्रशासनिक कारणों से देरी होती है, लेकिन इसे चुनाव में गड़बड़ी का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
दरअसल, जिस वीडियो ने इस पूरे विवाद को जन्म दिया है, उसमें जीतन राम मांझी यह कहते दिखाई देते हैं कि 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में उनके एक उम्मीदवार की स्थिति बेहद खराब थी, लेकिन डीएम से बात होने के बाद वही उम्मीदवार 2700 वोट से जीत गया। वीडियो में मांझी यह भी कहते हैं कि इस बार उस उम्मीदवार ने उनसे संपर्क नहीं किया, इसलिए वह चुनाव हार गया। विपक्ष ने इसी बयान को आधार बनाकर चुनावी सिस्टम पर सवाल उठाए हैं।
ठंड में ‘गैस’ समझकर की गई एक भूल बन सकती है जानलेवा.. सीने के दर्द पर डॉक्टर की बड़ी चेतावनी
कांग्रेस ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि यह बयान इस बात का संकेत है कि सत्ता पक्ष चुनाव आयोग के अधिकारियों के साथ “सेटिंग” कर चुनाव जीतता है। पार्टी ने लिखा कि डीएम चुनाव आयोग के ही अधिकारी होते हैं, ऐसे में इस तरह की बातचीत लोकतंत्र के लिए खतरा है। कांग्रेस का आरोप है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी और उनके सहयोगी दल वोट चोरी करके चुनाव जीत रहे हैं और इससे लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या हो रही है।
वहीं जीतन राम मांझी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है। उन्होंने इसे दलित नेता की छवि खराब करने की कोशिश बताया और कहा कि वे न तो किसी अवैध काम का समर्थन करते हैं और न ही उससे डरते हैं। मांझी के इस बयान के बाद यह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा बिहार की सियासत में और गरमाने वाला है।






















