दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट में लैंड फॉर जॉब मामले (Land for Job Case) की सुनवाई एक बार फिर टलने से राष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इस बहुचर्चित केस में लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार को फिलहाल राहत जरूर मिली है, लेकिन यह राहत स्थायी नहीं बल्कि प्रक्रियागत मानी जा रही है। विशेष सीबीआई जज विशाल गोगने ने आरोप तय करने को लेकर होने वाली सुनवाई को स्थगित करते हुए अगली तारीख 19 दिसंबर तय कर दी है। लगातार टलती सुनवाइयों ने इस केस को सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि सियासी विमर्श का भी केंद्र बना दिया है।
सोमवार को हुई सुनवाई में सीबीआई ने अदालत को बताया कि मामले के एक आरोपी का निधन हो चुका है। इस जानकारी के बाद कोर्ट ने जांच एजेंसी को निर्देश दिया कि वह मृत आरोपी की पुष्टि के साथ-साथ अन्य आरोपियों के जीवित या मृत होने से जुड़ी वेरिफिकेशन रिपोर्ट भी दाखिल करे। इससे पहले 8 दिसंबर को भी कोर्ट को बताया गया था कि इस केस में नामजद कुछ आरोपी अब जीवित नहीं हैं, जिसके बाद अदालत ने स्थिति स्पष्ट करने के लिए स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी। इस तकनीकी पहलू ने आरोप तय करने की प्रक्रिया को फिलहाल रोक दिया है।
गौर करने वाली बात यह है कि आरोप तय करने के मुद्दे पर अदालत इससे पहले भी दो बार फैसला टाल चुकी है। 10 नवंबर और 4 दिसंबर को किसी न किसी कानूनी अड़चन के चलते निर्णय नहीं हो सका। इससे पहले 25 अगस्त को कोर्ट ने इस विषय पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। लगातार बढ़ती तारीखें यह संकेत दे रही हैं कि मामला अब सिर्फ तथ्यों का नहीं, बल्कि प्रक्रिया और अनुमति से जुड़े सवालों में उलझता जा रहा है।
इस बीच लालू प्रसाद यादव ने सीबीआई की एफआईआर को रद्द कराने और ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया हुआ है। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि इस पूरे मामले में अभियोजन चलाने के लिए जरूरी कानूनी अनुमति नहीं ली गई, जिससे पूरी जांच ही अवैध हो जाती है। उनका तर्क रहा कि बिना वैधानिक स्वीकृति के किसी भी सार्वजनिक पद पर रहे व्यक्ति के खिलाफ जांच शुरू नहीं की जा सकती।
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दूसरी ओर, सीबीआई ने अदालत में यह स्पष्ट किया कि लालू यादव पक्ष जानबूझकर ट्रायल कोर्ट में आरोप तय करने के स्तर पर अपनी दलीलें नहीं रख रहा है, ताकि मामला लंबा खिंच सके। सीबीआई ने यह भी याद दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट 18 जुलाई को ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाने से साफ इनकार कर चुका है, जिससे यह संकेत मिलता है कि शीर्ष अदालत इस मामले को आगे बढ़ाने के पक्ष में है।
मामले में एक और अहम मोड़ तब आया, जब पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने प्रिंसिपल एंड डिस्ट्रिक्ट जज के समक्ष याचिका दाखिल कर विशेष जज विशाल गोगने की अदालत से केस को किसी अन्य कोर्ट में ट्रांसफर करने की मांग की। यह याचिका फिलहाल लंबित है और इसके फैसले का असर भी आगे की सुनवाई पर पड़ सकता है।
लैंड फॉर जॉब मामला उस दौर से जुड़ा है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र में रेल मंत्री थे। सीबीआई के अनुसार, रेलवे में नौकरी दिलाने के बदले जमीन लिए जाने का आरोप है। एजेंसी ने 7 अक्टूबर 2022 को पहली चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, मीसा भारती समेत 16 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इस चार्जशीट पर ट्रायल कोर्ट ने 25 फरवरी को संज्ञान लिया। इसके बाद 7 जून 2024 को सीबीआई ने अंतिम चार्जशीट दाखिल की, जिसमें कुल 78 आरोपियों के नाम शामिल हैं। इनमें रेलवे में नौकरी पाने वाले 38 उम्मीदवार भी शामिल बताए गए हैं।
अब सबकी नजर 19 दिसंबर की सुनवाई पर टिकी है। यह तारीख तय करेगी कि मामला आखिरकार आरोप तय होने की दिशा में बढ़ेगा या फिर किसी नई कानूनी पेचिदगी के कारण एक बार फिर टल जाएगा। फिलहाल, लालू परिवार के लिए यह राहत भले ही अस्थायी हो, लेकिन सियासी रूप से इसे बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है।






















