पटना में महागठबंधन की साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस ने बिहार की राजनीति में जोरदार हलचल पैदा कर दी। इस दौरान तेजस्वी यादव को आधिकारिक रूप से मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया और गठबंधन के घटक दलों के बीच सीट बंटवारे की औपचारिक घोषणा भी की गई। महागठबंधन नेताओं ने जनता को यह संदेश दिया कि वे एकजुट होकर बिहार में बदलाव की लड़ाई लड़ेंगे।

हालांकि, प्रेस कॉन्फ्रेंस की चमक-धमक के बीच कांग्रेस के अंदर बगावत की आवाजें उभरती दिखाई दीं। पटना स्थित सदाकत आश्रम में कई पूर्व विधायक और कांग्रेस कार्यकर्ता, जिन्होंने टिकट बंटवारे में अनदेखी और अन्याय महसूस किया, एक दिवसीय आमरण अनशन पर बैठ गए। नाराज़ नेताओं का आरोप है कि टिकट वितरण में पैसे और व्यक्तिगत स्वार्थ की भूमिका रही। उनके हाथों में तख्तियां थीं जिन पर लिखा था — “टिकट चोर बिहार छोड़।”
महागठबंधन ने तेजस्वी यादव पर जताया भरोसा.. CM फेस के ऐलान पर बोले- अब बिहार में बदलाव होगा
कांग्रेस प्रवक्ता माधव आनंद ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पार्टी में फैली अव्यवस्था की जिम्मेदारी सिर्फ बिहार प्रभारी कृष्ण अल्लावारू या स्थानीय नेतृत्व की नहीं, बल्कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की भी है। उनका कहना था कि “महागठबंधन में एकता दिखाने की कोशिश हो रही है, लेकिन अंदरूनी कलह इसे कमजोर कर सकती है।”






















