Samrat Chaudhary: बिहार की राजनीति के आज के दौर में अगर किसी नेता का नाम सबसे निर्णायक माना जा रहा है, तो वह हैं सम्राट चौधरी। कभी राबड़ी देवी सरकार में सबसे कम उम्र के मंत्रियों में शामिल रहे सम्राट चौधरी अब बिहार की सत्ता, रणनीतियों और चुनावी समीकरणों के केंद्र में हैं। बीजेपी ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष से लेकर उपमुख्यमंत्री तक की जिम्मेदारी देकर यह साफ कर दिया है कि आने वाले वर्षों में बिहार की राजनीति का बड़ा चेहरा वही होंगे।
उनके राजनीतिक सफर में जितने उतार–चढ़ाव हैं, उतनी ही तेजी से उनका ग्राफ बढ़ा है। आइए समझते हैं उनकी राजनीतिक क्रोनोलॉजी और मौजूदा सत्ता संरचना में उनकी भूमिका।
सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर
1990 दशक – राजनीति में पहला कदम
सम्राट चौधरी ने अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से की। यह वह दौर था जब बिहार में लालू यादव और राबड़ी देवी की राजनीति चरम पर थी।
1999 – राबड़ी देवी सरकार में मंत्री बने
सिर्फ 27 वर्ष की उम्र में वह राबड़ी देवी मंत्रिमंडल में कृषि राज्य मंत्री बने। उस समय उनकी कम उम्र और तेजी से उभार राष्ट्रीय चर्चा बना।
2000 – पहली बार विधायक बने
उन्होंने परबत्ता विधानसभा सीट से चुनाव जीता। यह उनका विधानसभा में प्रवेश था जिसने उन्हें सक्रिय राजनीति में मजबूत पहचान दी।
2010 – दोबारा विधायक और विपक्ष में भूमिका
एक दशक बाद फिर परबत्ता से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। इस बार वह विपक्ष के मुख्य सचेतक (Chief Whip) बने। यह उनकी संसदीय रणनीति और संगठनात्मक क्षमता का प्रमाण माना गया।
2014 – BJP में शामिल और मंत्री पद
बिहार की राजनीति में बड़ा मोड़ तब आया जब सम्राट चौधरी बीजेपी में शामिल हुए। बीजेपी–जेडीयू सरकार में उन्हें शहरी विकास एवं आवास विभाग का मंत्री बनाया गया।
इसी वर्ष उन्होंने केंद्र सरकार की योजनाओं को राज्य में लागू करने के लिए सक्रिय भूमिका निभाई।
2021 – पंचायती राज मंत्री बने
नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में उन्हें पंचायती राज विभाग दिया गया। ग्राम प्रशासन, स्वच्छता और पंचायत ढांचे को मजबूत करने में उनकी भूमिका अहम रही।
2023 – बिहार भाजपा अध्यक्ष बने
मार्च 2023 बीजेपी ने ओबीसी (कुशवाहा समुदाय) पर पकड़ मजबूत करने के लिए उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाया। यह उनके राजनीतिक जीवन की सबसे महत्वपूर्ण नियुक्ति मानी गई, जिसने उन्हें बिहार भाजपा का सबसे प्रभावशाली चेहरा बना दिया।
जनवरी 2024 – बीजेपी विधायक दल के नेता
चुनाव पूर्व राजनीतिक बदलाव में पार्टी ने उन्हें विधायक दल का नेता नियुक्त किया, जिससे यह संकेत और मजबूत हुआ कि भाजपा उन्हें एक बड़े चेहरे के रूप में पेश करने की योजना बना रही है।
2024–2025 – बिहार के उपमुख्यमंत्री बने
विधानसभा चुनावों में एनडीए की प्रचंड जीत के बाद बीजेपी ने उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाकर सत्ता का केंद्र बना दिया। यह सिर्फ एक पद नहीं, बल्कि बिहार की भविष्य की राजनीति की दिशा का संकेत था।
क्यों महत्वपूर्ण हैं सम्राट चौधरी?
सम्राट चौधरी की सबसे बड़ी ताकत उनकी जातिगत पहचान (कुशवाहा/कोइरी समाज), आक्रामक राजनीतिक शैली, संगठन पर पकड़ और भाजपा नेतृत्व के साथ मजबूत संबंध हैं। अमित शाह के करीबी माने जाने वाले सम्राट को भाजपा ने बिहार में अपना सबसे बड़ा दांव बनाकर पेश किया है, ताकि ओबीसी राजनीति में पार्टी की स्थिति मजबूत हो और एनडीए की स्थिरता बनी रहे।
उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि भी मजबूत है। पिता शकुनी चौधरी दशकों तक खगड़िया की राजनीति के दिग्गज रहे, जबकि मां पार्वती देवी विधायक रहीं। इस वजह से सम्राट बचपन से ही राजनीतिक माहौल में पले और राजनीति उनके स्वभाव का हिस्सा बन गई।
भले ही उनके खिलाफ विवाद भी रहे, जैसे शैक्षणिक योग्यता पर सवाल और कुछ बयानों को लेकर राजनीतिक आलोचना, लेकिन उनका ग्राफ लगातार ऊपर ही गया है।






















