Tej Pratap Yadav meets Lalu: बिहार की राजनीति में निजी रिश्ते अक्सर सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बन जाते हैं और जब बात लालू प्रसाद यादव के परिवार की हो, तो हर मुलाकात के मायने निकाले जाते हैं। करीब सात महीने बाद तेज प्रताप यादव का अपने पिता लालू प्रसाद यादव से मिलना इसी कड़ी में एक अहम राजनीतिक और भावनात्मक संकेत माना जा रहा है। दिल्ली में हुई इस मुलाकात ने न सिर्फ पारिवारिक रिश्तों पर जमी बर्फ को थोड़ा पिघलाया है, बल्कि आरजेडी के भीतर चल रही खामोश हलचलों को भी फिर से चर्चा में ला दिया है।
लैंड फॉर जॉब मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट में पेशी के बाद तेज प्रताप यादव बहन मीसा भारती के आवास पहुंचे, जहां इन दिनों लालू यादव भी रह रहे हैं। मुलाकात से पहले मीडिया से बातचीत में तेज प्रताप ने साफ कहा कि कानूनी लड़ाई वे पूरी मजबूती से लड़ेंगे। इसके बाद जब वे पिता से मिलकर बाहर निकले तो उनके चेहरे पर अलग ही सुकून और आत्मविश्वास झलक रहा था। उन्होंने बताया कि उन्होंने पिता से आशीर्वाद लिया है और मकर संक्रांति पर होने वाले दही-चूड़ा भोज का निमंत्रण भी दे दिया है। तेज प्रताप का यह कहना कि लालू यादव उन्हें आशीर्वाद देने जरूर आएंगे, रिश्तों में आई नरमी की ओर इशारा करता है।
यह मुलाकात इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि अनुष्का यादव प्रकरण के बाद तेज प्रताप यादव को पार्टी और परिवार से अलग-थलग कर दिया गया था। इसके बाद पिता-पुत्र के संबंधों में दूरी साफ नजर आने लगी थी। सात महीने बाद हुई यह मुलाकात बताती है कि राजनीतिक मतभेदों और पारिवारिक विवादों के बावजूद भावनात्मक रिश्ता पूरी तरह टूटा नहीं है। इससे पहले तेज प्रताप यादव एक जनवरी को अपनी मां राबड़ी देवी के जन्मदिन पर 10 सर्कुलर रोड भी गए थे, जिसे भी रिश्तों में सुधार के संकेत के तौर पर देखा गया था।
दिल्ली दौरे के दौरान तेज प्रताप यादव का तेजस्वी यादव से भी सामना हुआ, लेकिन यह मुलाकात बेहद औपचारिक और क्षणिक रही। कोर्ट परिसर में लिफ्ट से बाहर निकलते वक्त दोनों भाइयों का आमना-सामना कुछ पलों के लिए हुआ, इसके अलावा कोई लंबी बातचीत नहीं हुई।
तेज प्रताप यादव ने इस मौके पर यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने दही-चूड़ा भोज का निमंत्रण सिर्फ परिवार तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि कई एनडीए नेताओं को भी न्योता दिया है। इसे वे अपनी अलग राजनीतिक पहचान और सक्रियता के रूप में पेश कर रहे हैं। मकर संक्रांति जैसे सामाजिक और सांस्कृतिक अवसर पर यह भोज उनके लिए शक्ति प्रदर्शन और रिश्तों की मरम्मत, दोनों का मंच बन सकता है।






















