लखनउ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उनके लिए राजनीति कोई फुलटाइम जॉब नहीं है। उन्होंने कहा, “पार्टी नेतृत्व ने मुझे यूपी की जनता की सेवा का दायित्व सौंपा है। मैं मूल रूप से एक योगी हूं, राजनीति मेरे लिए स्थायी पेशा नहीं। जब तक हूं, काम करता हूं, और इसका भी एक समय होता है।” इस बयान पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए एक्स पर लिखा, “जो राजनीति को पार्ट-टाइम समझते हैं, उन्हें यह करना ही नहीं चाहिए। सच्ची राजनीति सेवा है, जिसके लिए 24 घंटे भी कम पड़ते हैं।” अखिलेश ने नाम नहीं लिया, लेकिन उनका निशाना साफ था। योगी ने पहले भी कहा है कि वह पहले गोरक्षपीठ के महंत हैं, फिर मुख्यमंत्री। अपनी सरकार के 8 साल पूरे होने पर पीटीआई को दिए इंटरव्यू में उन्होंने वक्फ संपत्ति, दंगे और महाकुंभ जैसे मुद्दों पर भी बात की।
वक्फ बिल पर योगी: अच्छे काम का विरोध तो होगा ही
वक्फ संशोधन विधेयक पर योगी ने कहा, “हर अच्छे कदम का विरोध होता है। वक्फ बोर्ड क्या एक भी ऐसा काम बता सकता है, जो समाज के भले के लिए किया हो? ये निजी स्वार्थ के अड्डे बन गए हैं। सरकारी जमीन पर कब्जे का जरिया बन गए हैं। सुधार का विरोध होगा, लेकिन समय और हालात के हिसाब से बदलाव जरूरी है। इससे मुस्लिम समाज को फायदा होगा और कानून-व्यवस्था की समस्याएं भी कम होंगी।”
“मठ-मंदिर गोशाला चलाते हैं, वक्फ क्या करता है?”
योगी ने आगे कहा, “हिंदू मठ-मंदिर सीमित संसाधनों से गोशाला, स्कूल, कैंटीन, अस्पताल और मेडिकल कॉलेज चलाते हैं। गरीब बच्चों को स्कॉलरशिप देते हैं, बिना सरकारी मदद के। वक्फ बोर्ड ने ऐसा क्या किया? इनके पास मंदिरों से कई गुना संपत्ति है। ये जिस जमीन को वक्फ बता दें, उसे मान लिया जाता है। यह कहां का न्याय है? संपत्ति पर कब्जे की मानसिकता खत्म होनी चाहिए। वक्फ का ऑडिट हो, यह पता चले कि समाज या मुस्लिम समुदाय के लिए क्या किया गया।”